पर्वतवेदा मेडिकेयर के सिद्ध सिद्धांतों पर आधारित शास्त्रीय आरोग्यशाला
पवित्र गया जी की पावन तपोभूमि पर 35+ वर्षों की रसशाला परंपरा • त्रिदोष संतुलन, पंचकर्म एवं समग्र स्वास्थ्य
पवित्र फल्गु नदी के पावन तट पर स्थित पर्वतवेदा मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड महर्षि चरक एवं सुश्रुत के शास्त्रोक्त नियमों के अनुरूप असाध्य वात, पित्त और कफ विकारों के स्थायी निवारण हेतु समर्पित एक प्रामाणिक एवं आयुष प्रमाणित संस्थान है। यहां रोग को केवल दबाया नहीं जाता, बल्कि नाड़ी परीक्षा द्वारा जड़ से समाप्त किया जाता है।

पर्वतवेदा मेडिकेयर एवं वैदिक आरोग्य तपोभूमि
गया जी मुख्य संस्थान में विशाल वानस्पतिक वाटिका, इन-पेशेंट पंचकर्म कुटीर, और पवित्र फल्गु की शीतल छाया में आरोग्य प्राप्ति का पावन वातावरण।
“प्रयोजनं चास्य स्वस्थस्य स्वास्थ्यरक्षणमातुरस्य विकारप्रशमनं च ॥”
आयुर्वेद का प्रधान प्रयोजन: स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा रोगी व्यक्ति के विकार (रोग) का समूल विनाश करना।
रोग के मूल कारण को नष्ट करने का 35 वर्षों का अखंड संकल्प
आज के आधुनिक युग में जहां रोगों के केवल लक्षणों को लगातार पेनकिलर या स्टेरॉयड द्वारा दबाया जाता है, वहीं पर्वतवेदा मेडिकेयर त्रिदोष सिद्धांत (वात, पित्त, कफ) के आधार पर रोग की जड़ पर प्रहार करता है।
हम प्राचीन अष्टविध नाड़ी परीक्षा द्वारा यह ज्ञात करते हैं कि शरीर में कौन सा दोष प्रकुपित हुआ है। तत्पश्चात शास्त्रीय पंचकर्म तथा अपनी पाषाण खरल रसशाला में 21 दिनों तक घुटाई करके तैयार की गई शुद्ध भस्मों व क्वाथों द्वारा रोगी को पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करते हैं।
प्रकृति एवं अष्टविध नाड़ी परीक्षा (Pulse Diagnosis)
प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (वात-पित्त-कफ) अद्वितीय होती है। हम लक्षणों के बजाय रोगी की आंतरिक प्रकृति के अनुसार व्यक्तिगत चिकित्सा योग निर्धारित करते हैं।
आम-दोष का समूल निष्कासन (Deep Toxin Detox)
शरीर के सूक्ष्म स्रोतों में जमा दूषित 'आम' (Cellular Toxins) ही गठिया, मधुमेह व त्वचा रोगों का मुख्य कारण है। पंचकर्म द्वारा पहले इस विषैले तत्व को बाहर निकाला जाता है।
पाषाण खरल एवं पुटपाक रसौषधियां (Stone Mortar Alchemy)
संस्थान की अपनी रसशाला में 21 दिनों तक शिला खरल में जड़ी-बूटियों का मर्दन करके स्वर्ण भस्म, रस-रसायन एवं तेल तैयार किए जाते हैं, जिससे उनकी जैव-सक्रियता (Bio-availability) उच्चतम होती है।
जन-सुलभ व पारदर्शी सेवा (Transparent & Compassionate Care)
डिजिटल टोकन कतार प्रणाली, न्यूनतम परामर्श शुल्क एवं बिना किसी अनावश्यक जांच के हर साधारण परिवार के लिए प्रामाणिक आयुर्वेद सुलभ कराना हमारा परम धर्म है।
गया जी मुख्य संस्थान एवं शास्त्रीय अनुसंधान पीठ
प्राचीन रसशाला, पंचकर्म कुटीर, दुर्लभ वनस्पति वाटिका एवं आधुनिक गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला।
शास्त्रीय रसशाला व खरल मर्दन
प्राचीन पाषाण शिला खरल द्वारा 100+ दुर्लभ वनौषधियों का 21 दिनों तक शास्त्रीय संस्कार।
पंचकर्म एवं शिरोधारा कुटी
नीम काष्ठ द्रोणी, कांसा पात्र, जानु-कटि बस्ति एवं ध्यानमय परिवेश में पूर्ण शारीरिक कायाकल्प।
द्रव्यगुण औषधीय वाटिका
150 से अधिक दुर्लभ व संकटापन्न जड़ी-बूटियों का जैविक संवर्धन एवं दैनिक अर्क निष्कर्षण।
नाड़ी परीक्षा एवं परामर्श पीठ
शांत, ध्यानमय वातावरण में अनुभवी आयुर्वेदाचार्यों द्वारा अष्टविध नाड़ी स्पंदन परीक्षण।
वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य एवं विशेषज्ञ मंडल
दशकों के अनुभव से संपन्न वरिष्ठ नाड़ी विशेषज्ञ एवं रसशाला मर्मज्ञ, जो असाध्य रोगों में समर्पित सेवा दे रहे हैं।
आचार्य वैद्य रमाकांत शर्मा
नाड़ी परीक्षा में 34 वर्षों का अद्वितीय अनुभव। 80,000+ से अधिक नाड़ियों का सटीक परीक्षण कर बिना शल्य चिकित्सा हजारों मरीजों को रोगमुक्त किया।
डॉ. प्रियम्वदा मिश्रा
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान से शोध उपाधि प्राप्त। सोरायसिस, पुराने चर्म रोग एवं स्त्री रसायन चिकित्सा में शास्त्रीय पंचकर्म की विशेषज्ञ।
डॉ. अनिमेष शास्त्री
मर्म चिकित्सा एवं वात व्याधियों के जाने-माने विशेषज्ञ। साइटिका एवं जोड़ों की जकड़न को शास्त्रीय लेप व मर्म बिंदुओं के उद्दीपन द्वारा ठीक करते हैं।
वैद्य महावीर पाण्डेय
संस्थान की पारम्परिक रसशाला के प्रमुख। शुद्ध स्वर्ण, रजत एवं अभ्रक भस्मों का शास्त्रीय पुटपाक विधि से निर्माण सुनिश्चित करते हैं।
गया जी संस्थान एवं निर्माणशाला दीर्घा
चिकित्सालय परिसर, पाषाण खरल निर्माणशाला, पंचकर्म कुटीर एवं दुर्लभ वनस्पति संवर्धन की प्रामाणिक झलकियां।
शास्त्रीय रसशाला एवं पाषाण खरल मर्दन
गया जी मुख्य रसशाला में शुद्ध शिला खरल द्वारा 100 से अधिक दुर्लभ वनौषधियों का 21 दिनों तक शास्त्रीय संस्कार।
शास्त्रीय पंचकर्म एवं शिरोधारा कक्ष
शुद्ध नीम की काष्ठ द्रोणी, कांसा पात्र एवं ध्यानमय वातावरण
द्रव्यगुण औषधीय वनस्पति वाटिका
150 से अधिक दुर्लभ वनस्पतियों का जैविक संवर्धन
पवित्र गया जी चिकित्सा परिसर
तुलसी, नीम, अशोक से युक्त औषधीय वाटिका एवं फल्गु की शीतल बयार
कटि एवं जानु बस्ति मर्म कक्ष
रीढ़ और घुटने के कार्टिलेज घिसाव हेतु उष्ण औषधीय तैल धारण एवं मर्म चिकित्सा।
पुटपाक, क्वाथ एवं रसायन शोधन
वैदिक अग्निहोत्र पुटपाक द्वारा भस्म व अरिष्ट का शास्त्रीय परिशोधन
नाड़ी परीक्षा एवं त्रिदोष परीक्षण
अष्टविध नाड़ी स्पंदन द्वारा वात, पित्त, कफ के असंतुलन की सटीक पहचान व वैयक्तिक उपचार।

प्राचीन वैदिक चिकित्सा द्वारा असाध्य रोगों का जड़ से समाधान
गया जी मुख्य चिकित्सालय अथवा 17+ क्षेत्रीय केंद्रों पर अनुभवी आयुर्वेदाचार्य से संपर्क करें
गठिया, साइटिका, सर्वाइकल, सोरायसिस, मधुमेह एवं उदर विकारों के स्थायी निवारण हेतु आज ही निःशुल्क परामर्श टोकन बुक करें या शास्त्रीय रसशाला निर्मित औषधियां सीधे अपने घर मंगाएं।