संधिवात / आमवात (गठिया, घुटनों का घिसाव एवं साइटिका)
Non-Surgical Cartilage Regeneration • Janu Basti & Classical Vedic Protocol
आयुर्वेद में संधिवात का मूल कारण प्रकुपित वात दोष एवं घुटनों के श्लेषक कफ (सायनोवियल ग्रीस) का सूखना है। जब जोड़ों में रुक्षता बढ़ती है, तो कार्टिलेज घिसने लगता है और असहनीय दर्द होता है। पर्वतवेदा संस्थान में जानु बस्ति, पत्र पिण्ड स्वेद तथा 21 दिनों तक खरल में घोटकर तैयार की गई संधिमुक्त औषधियों द्वारा बिना किसी ऑपरेशन के जोड़ों को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ किया जाता है।
गठिया के प्रकार एवं रोग के चेतावनी लक्षण
आयुर्वेद में प्रत्येक प्रकार के जोड़ों के दर्द का अलग कारण व उपचार है। नीचे अपने रोग की सटीक पहचान करें:
संधिगत वात (Sandhigata Vata / Osteoarthritis)
उम्र बढ़ने या रुक्ष आहार से घुटने का श्लेषक कफ (ग्रीस) सूख जाता है। हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं जिससे कट-कट की आवाज और चलने पर अत्यधिक दर्द होता है।
आमवात (Amavata / Rheumatoid Arthritis)
पाचन अग्नि कमजोर होने पर बना कच्चा 'आम रस' वात के साथ मिलकर छोटे-बड़े जोड़ों में फैलता है। सुबह उठने पर भारी जकड़न, बुखार जैसा अहसास व जोड़ों में तेज सूजन रहती है।
वातरक्त (Vatarakta / High Uric Acid Gout)
रक्त धातु दूषित होने से यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स पैर के अंगूठे, एड़ी व टखनों में जमा हो जाते हैं। छूने पर भीषण जलन और असहनीय चुभन होती है।
गृध्रसी (Gridhrasi / Sciatica & Spinal Nerve Compression)
कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर कूल्हे व पूरे पैर की एड़ी तक बिजली जैसा असहनीय खिंचाव, सुन्नपन व पैर उठाने में असमर्थता।
गठिया एवं संधिवात के प्रमुख चेतावनी लक्षण:
संस्थान की प्रमाणित पंचकर्म एवं शास्त्रीय औषधियां
गया जी मुख्य अस्पताल एवं 17+ क्षेत्रीय केंद्रों पर अनुभवी आयुर्वेदाचार्यों द्वारा संचालित विशिष्ट प्रक्रियाएं:
जानु बस्ति (Janu Basti)
उड़द के आटे की घेराबंदी कर घुटनों के जोड़ों पर 45 मिनट तक औषधीय उष्ण तैल (महानारायण व क्षीरबला) का अविरल धारण। यह सूखे कार्टिलेज को पुनर्जीवित करता है।
पत्र पिण्ड स्वेद (Pottali)
निर्गुण्डी, एरण्ड व अर्क पत्तों की सिद्ध औषधीय पोटली को गर्म तैल में डुबोकर जोड़ों का स्वेदन किया जाता है। इससे जोड़ों की गहरी सूजन व जकड़न 7 दिनों में कम होती है।
शुद्ध गुग्गुलु व शल्लकी वटी
संस्थान की रसशाला में पाषाण खरल में 21 दिन मर्दन कर निर्मित योगराज, कैशोर गुग्गुलु व शल्लकी सत्व। यह यूरिक एसिड घटाकर आंतरिक सूजन को समूल नष्ट करते हैं।
रास्ना सप्तक क्वाथ (Decoction)
अस्थि, मज्जा एवं स्नायुओं को बल देने वाला तथा प्रकुपित वात दोष का शमन करने वाला प्रसिद्ध शास्त्रीय काढ़ा। नसों की कमजोरी दूर कर स्थायी शक्ति प्रदान करता है।
पथ्य एवं अपथ्य — क्या खाएं और क्या न खाएं
औषधि के साथ सही खान-पान से जोड़ों में ग्रीस बनने की प्रक्रिया 3 गुना तेज हो जाती है:
पथ्य - क्या खाएं एवं क्या करें (Beneficial Habits)
वात-शामक एवं कार्टिलेज संवर्धक आहारअपथ्य - क्या न खाएं एवं क्या न करें (Harmful Foods)
वात-प्रकोपक एवं सूजन बढ़ाने वाली चीजेंसंधिमुक्त तैल एवं वटी किट (Sandhimukta Amrit Kit)
घुटनों के घिसाव (ग्रीस की कमी), कट-कट की आवाज, सूजन एवं पुराने साइटिका के दर्द का 100% प्राकृतिक शास्त्रीय समाधान। तिल तैल पाक विधि द्वारा 21 दिनों तक खरल में सिद्ध किया गया परम प्रभावी योग।
“डॉक्टरों ने दोनों घुटने बदलवाने (Total Knee Replacement) का खर्च ₹4 लाख बताया था। मैंने गया जी के पर्वतवेदा संस्थान में 45 दिन जानु बस्ति कराया और संधिमुक्त तेल-वटी का नियमित सेवन किया। आज मैं बिना किसी सहारे या लाठी के आराम से चल रहा हूँ और दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया है।”

घुटनों के दर्द और गठिया से हमेशा के लिए मुक्ति पाएं
गया जी मुख्य अस्पताल अथवा 17+ क्षेत्रीय केंद्रों पर अनुभवी आयुर्वेदाचार्य से नाड़ी परीक्षा कराएं
नाड़ी परीक्षा एवं जानु बस्ति द्वारा रोग के मूल कारण का निवारण। आज ही अपना निःशुल्क परामर्श टोकन बुक करें या शुद्ध औषधियां घर बैठे मंगाएं।