संधिवात / आमवात (गठिया व जोड़ों का दर्द)
Ayurvedic Protocol for Osteoarthritis, Knee Pain & Cartilage Regeneration
आयुर्वेद के अनुसार गठिया दो प्रकार का होता है: आमवात (पाचन की कमजोरी से बना आम रस जब वात के साथ संधियों में जमा हो) और संधिगत वात (वात के बढ़ने से जोड़ों के तरल का सूखना)। हमारी चिकित्सा आम रस का पाचन कर वात का शमन करती है।
In Ayurveda, joint pain is classified into Sandhigata Vata (Osteoarthritis caused by aggravated Vata drying synovial fluid) and Amavata (Rheumatoid arthritis caused by toxic Ama accumulation circulating in the joints with Vata). Treatment focuses on digesting Ama, expelling Vata from deep Asthi-Sandhi dhatus, and replenishing Shleshaka Kapha (joint lubrication).
गठिया के प्रमुख लक्षण (Symptoms)
आयुर्वेदिक वर्गीकरण (Classification)
रुक्ष वात बढ़ने से घुटने का श्लेषक कफ सूखने लगता है। जानु बस्ति द्वारा स्निग्ध औषधीय तेल भर कर घिसे हुए कार्टिलेज का पोषण किया जाता है।
मंदाग्नि से उत्पन्न आम (विषाक्त रस) वात के साथ मिलकर छोटे-बड़े जोड़ों में भयानक दर्द व सूजन उत्पन्न करता है। आमपाचन औषधियों से इसका स्थायी निवारण होता है।
संधिवात निवारक पंचकर्म एवं शास्त्रीय औषधियां
संस्थान की प्रामाणिक पंचकर्म विधियां एवं रसशाला में निर्मित योग।
जानु बस्ति (Janu Basti)
उड़द के आटे की घेराबंदी कर घुटनों पर महानारायण व क्षीरबला तैल का उष्ण धारण।
पत्र पिण्ड स्वेद (Pottali)
निर्गुण्डी, एरण्ड व अर्क पत्तों की औषधीय पोटली से जोड़ों की जकड़न व तीव्र सूजन दूर की जाती है।
शुद्ध गुग्गुलु एवं शल्लकी
योगराज व कैशोर गुग्गुलु जो यूरिक एसिड घटाकर जोड़ों की सूजन जड़ से समाप्त करते हैं।
रास्ना सप्तक क्वाथ
अस्थि व मज्जा धातु को बल देने वाला तथा वात नाशक प्रसिद्ध शास्त्रीय काढ़ा।
पथ्य - क्या खाएं एवं क्या करें (Dos)
अपथ्य - क्या न खाएं एवं क्या न करें (Don'ts)
“डॉक्टरों ने दोनों घुटने बदलवाने (Total Knee Replacement) का खर्च 4 लाख बताया था। मैंने गया जी के पर्वतवेदा संस्थान में 45 दिन जानु बस्ति और क्वाथ का नियमित सेवन किया। आज मैं बिना किसी लाठी के आराम से चल रहा हूँ।”
घुटनों के दर्द और गठिया से हमेशा के लिए मुक्ति पाएं
गया जी मुख्य अस्पताल अथवा क्षेत्रीय केंद्रों पर नाड़ी परीक्षा व जानु बस्ति हेतु टोकन बुक करें।