मधुहारी अमृत वटी एवं क्वाथ
Hba1c का प्राकृतिक संतुलन एवं पैंक्रियाज सक्रियण
यह औषधि रोग के मूल कारण पर कैसे कार्य करती है?
सायनोवियल ग्रीस पुनर्निर्माण
घुटनों के जोड़ों में सूखे कार्टिलेज व ग्रीस को प्राकृतिक रूप से पोषण देकर कट-कट की आवाज रोकता है।
वात-शामक एवं शोथहर
शल्लकी व निर्गुण्डी जोड़ों की गहरी सूजन, यूरिक एसिड जमाव एवं जकड़न को 7-14 दिनों में कम करते हैं।
नसों के खिंचाव में राहत
प्रसारिणी तैल साइटिका व कमर की दबी हुई नसों में रक्त प्रवाह सुचारू कर झनझनाहट दूर करता है।
किडनी व लिवर पर सुरक्षित
एलोपैथिक पेनकिलर्स के विपरीत 100% वनौषधि निर्मित, जो आमाशय व गुर्दों को हानि नहीं पहुंचाती।
प्राचीन तैलपाक विधि एवं भैषज्य रत्नावली संदर्भ
मधुहारी अमृत वटी अग्न्याशय (पैंक्रियाज) के बीटा सेल्स को प्राकृतिक रूप से उत्तेजित कर इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती है। यह बार-बार पेशाब आना, कमजोरी, तलवों में जलन और सुन्नपन जैसे मधुमेह के दुष्प्रभावों को जड़ से समाप्त करती है।
A synergy of Vijaysar, Gurmar, Jamun seed, and Karela that supports natural beta-cell regeneration, prevents neuropathy, and stabilizes fasting and post-prandial glucose.
“वातव्याधि प्रकोपे तु तैलं पाके विधीयते । सन्धिमज्जा विशोधार्थं शल्लकी गुग्गुलु युतम् ॥”
यह योग भैषज्य रत्नावली, चक्रदत्त एवं चरक संहिता के वातव्याधि चिकित्सा अध्याय के मूल नियमों के अनुसार तिल तैल में 21 दिनों तक औषधियों को सिद्ध करके तैयार किया गया है।
किन-किन रोगों में यह अत्यंत प्रभावकारी है (Key Indications):
क्या आप अस्पताल आकर नाड़ी परीक्षा कराना चाहते हैं?
पर्वतवेदा गया जी मुख्य चिकित्सालय या 17+ क्षेत्रीय केंद्रों पर परामर्श हेतु आज ही टोकन लें।
अन्य संबंधित शास्त्रीय रसौषधियां
संधिमुक्त तैल एवं वटी
संधिमुक्त तैल एवं वटी घुटनों में सायनोवियल कार्टिलेज (ग्रीस) की कमी, कट-कट की आवाज, सूजन और असहनीय दर्द को दूर करने वाला 100% प्राकृतिक तेल व वटी है। यह वात दोष को शांत कर जोड़ों को लचीलापन प्रदान करता है।
स्वर्ण भस्म अमृत च्यवनप्राश
संस्थान की रसशाला में प्राचीन विधि अनुसार ताजे जंगली आंवले, शुद्ध गाय का घी, कश्मीरी केसर एवं 24 कैरेट स्वर्ण भस्म के मिश्रण से निर्मित। यह शरीर की सातों धातुओं को पुष्ट कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को चरम स्तर पर पहुंचाता है।
त्वक शुद्धि क्वाथ एवं लेप
त्वक शुद्धि क्वाथ यकृत (लीवर) और रक्त में जमे दूषित पित्त और टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर सोरायसिस की पपड़ीदार त्वचा, लाल चकत्ते और एक्जिमा की असहनीय खुजली को शांत करता है। साथ में दिया जाने वाला आयुर्वेदिक लेप त्वचा को सामान्य बनाता है।

रोग को दबाएं नहीं, जड़ से समाप्त करें
35 वर्षों के अनुभूत शास्त्रीय पुटपाक योगों द्वारा असाध्य रोगों का स्थायी समाधान
घर बैठे शुद्ध शास्त्रीय औषधियां मंगाएं या अपने निकटतम केंद्र पर नाड़ी परीक्षा हेतु निःशुल्क परामर्श टोकन जनरेट करें।