संधिमुक्त तैल एवं वटी
संधिमुक्त तैल एवं वटी घुटनों में सायनोवियल कार्टिलेज (ग्रीस) की कमी, कट-कट की आवाज, सूजन और असहनीय दर्द को दूर करने वाला 100% प्राकृतिक तेल व वटी है। यह वात दोष को शांत कर जोड़ों को लचीलापन प्रदान करता है।
प्रमुख संकेत एवं लाभ (Key Indications & Benefits):
प्रमुख वनौषधि घटक (Key Herbal Ingredients)
शास्त्रीय संदर्भ (Classical Samhita Reference):
यह योग चरक संहिता, चक्रदत्त, सुश्रुत संहिता एवं भैषज्य रत्नावली के प्रमाणिक श्लोकों के अनुसार विधिपूर्वक सिद्ध किया गया है।
सेवन विधि एवं अनुपान (Dosage Guide)
* Note: सर्वोत्तम परिणाम हेतु संस्थान के वैद्य से अपनी नाड़ी या लक्षणों के अनुसार व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें।
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View All →स्वर्ण भस्म अमृत च्यवनप्राश
संस्थान की रसशाला में प्राचीन विधि अनुसार ताजे जंगली आंवले, शुद्ध गाय का घी, कश्मीरी केसर एवं 24 कैरेट स्वर्ण भस्म के मिश्रण से निर्मित। यह शरीर की सातों धातुओं को पुष्ट कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को चरम स्तर पर पहुंचाता है।
मधुहारी अमृत वटी एवं क्वाथ
मधुहारी अमृत वटी अग्न्याशय (पैंक्रियाज) के बीटा सेल्स को प्राकृतिक रूप से उत्तेजित कर इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती है। यह बार-बार पेशाब आना, कमजोरी, तलवों में जलन और सुन्नपन जैसे मधुमेह के दुष्प्रभावों को जड़ से समाप्त करती है।
त्वक शुद्धि क्वाथ एवं लेप
त्वक शुद्धि क्वाथ यकृत (लीवर) और रक्त में जमे दूषित पित्त और टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर सोरायसिस की पपड़ीदार त्वचा, लाल चकत्ते और एक्जिमा की असहनीय खुजली को शांत करता है। साथ में दिया जाने वाला आयुर्वेदिक लेप त्वचा को सामान्य बनाता है।